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EVM को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, विपक्ष.....

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EVM को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, विपक्ष के पास क्या है विकल्प गाज़ीपुर टुडे न्यूज    EVM के बवाल को सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा के लिए खत्म कर दिया? EVM-VVPAT Case: भारत में जब से ईवीएम का इस्तेमाल होना शुरू हुआ है, तब से उस पर सवालिया निशान भी लगते रहे हैं. इस बार सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि चुनाव ईवीएम से ही होंगे. EVM के बवाल को सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा के लिए खत्म कर दिया? सुप्रीम कोर्ट ईवीएम और वीवीपैट मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया  Supreme Court On EVM-VVPAT Case: लोकसभा चुनाव की वोटिंग के बीच इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वीवीपैट को लेकर सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आया है, उससे ईवीएम पर सवाल उठने भले ही कम हों न हों, लेकिन एक बात तो तय है कि अब भारत में चुनाव का वर्तमान और भविष्य तो ईवीएम ही है, जिसपर सवाल उठाने से पहले कई बार सोचना पड़ेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने जो फैसला दिया है, वो हर चुनाव में इस्तेमाल हो रहे ईवीएम की जरूरत पर एक मुहर की तरह है, जिसका फिलहाल कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है. हमेशा उठे हैं ईवीएम पर...

वोट क्यों दें और किस दें?

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   नमस्कार मैं आशीष पांडेय और आज चर्चा करेंगे लोकसभा चुनाव को लेकर। कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे जैसे-  रोटी, कपड़ा, मकान, बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा, रोजगार,आबादी और महंगाई पर क्रमशः चर्चा करेंगे। पूरा वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें।  जैसा कि आप जानते हैं कि लोकसभा चुनाव को लेकर सूचनाएं जारी हो चुकी हैं। आदर्श आचार्य संहिता भी लग गया है और और कट्टर ईमानदार और कट्टर समाजसेवी नेताओं के दल तथा विचारधारा बदलने का कार्यक्रम भी शुरू हो गया है। ऐसे में हमारा और आपका सोचने का यह कर्तव्य तो जरूर बनता है कि जो आदमी 5 साल एक पार्टी में नहीं रह सकता एक विचारधारा का नहीं रह सकता वह आपका कैसे हो सकता है। यह जो हर-चार दिन पर पार्टी बदलने वाले नेता हैं। यह आपके लिए नहीं अपने विकास के लिए पार्टी बदलते हैं। इनको न ही अपने और न ही आपके सिद्धांतों, विचारधारा और नैतिक मूल्यो से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं है। हां इनको लेना-देना है तो बस आपकी और अपनी जाति से क्योंकि जब यह 5 साल के बाद फिर चुनाव में आते हैं तो यह अपनी जाति और आपकी जाति का मिलान करना शुरू कर देते हैं क्योंकि नेताओ पता है कि...

आखिर वोट क्यों डालें ?

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       गाज़ीपुर टुडे न्यूज   दोस्तों मै आशीष पांडेय और आज चर्चा करेंगे हम लोकसभा चुनाव को लेकर। दोस्तों 2024 का लोकसभा चुनाव बहुत ही नजदीक आ गया है। आचार संहिता भी लग गयी है और चुनाव की तारीख का ऐलान हो गया है लेकिन हर बार की बात इस बार भी हम लोग चुनाव के अर्थ और महत्व से दूर होते जा रहे हैं। चुनाव का असल मायने में अर्थ क्या है ? चुनाव का अर्थ है कि दो या दो से अधिक व्यक्तियों अर्थात हजारों, लाखों, करोड़ों के बीच उस व्यक्ति का चुनाव करना (जिस उद्देश्य चुनाव हो रहा है) उसके काबिल हो लेकिन आज के समय में काबिलियत की परिभाषा जातिवाद, धर्मवाद, परिवारवाद, क्षेत्रवाद और भाषावाद तक सिमट कर रह गई है और आरोप प्रत्यारोप के दौर में किसी भी नेता या पार्टी को लेकर कुछ प्रतिक्रिया देना भी चुनौतियों से कम नहीं है। असल में चुनाव जिस मुद्दे को लेकर हो रहा है वह मुद्दा कहां है? यह भी कटु सत्य है कि कुछ ऐसे मुद्दे थे जो सामान्य जनमानस के लिए जरूरी थे। जैसे बिजली, पानी, सड़क,  रोटी और मकान। अब वह लगभग लगभग समाप्त हो चुके हैं। यूं कहें तो 90% लोगों तक दैनिक जीवन की चीज पहुंच गई ...